वैभव सूर्यवंशी का लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे तेज अर्धशतक, महज 29 गेंदों में 94 रन ठोक दिए
सीबीआई ने कहा इस नाम का नहीं हैं कोई जांच अधिकारी
कोलकाता। आरजी कर कांड की सीबीआई जांच में राजनीतिक दबाव डाले जाने एक पत्र वायरल हो रहा है। सीबीआई ने मंगलवार को इस पर सफाई दी और इसे पूरी तरह फर्जी करार दिया।
सीबीआई की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह पत्र जिस अधिकारी के नाम से जारी किया गया है, इस नाम का कोई अधिकारी जांच एजेंसी में नहीं है। दरअसल आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुए रेप मर्डर मामले की जांच सीबीआई कर रही है। पिछले कुछ दिनों ने सोशल मीडिया पर एक पत्र लगातार वायरल हो रहा है, यह पत्र डॉ. आकाश नाग के नाम से लिखा गया है, जिसमें उन्हें डीआईजी संयुक्त निदेशक, अपराध शाखा बताया गया है।
केंद्रीय गृह सचिव को लिखे गए इस पत्र में आकाश नाग की ओर से जांच में राजनीतिक दबाव डाले जाने की बात लिखी गई है, जिसे सीबीआई ने फर्जी करार दिया है। सीबीआई ने जिस पत्र का खंडन किया है, उस वायरल चि_ी में आकाश नाग के नाम से लिखा गया है कि मैं केस नंबर 012990/डब्लूबीएस जो आरजीकर मेडिकल कॉलेज में हुए मर्डर से संबंधित है, उससे अलग होने की अनुमति चाहता हूं। मैं बड़े दुख के साथ सूचित कर रहा हूं कि जांच को राजनीतिक दबाव डालकर प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। इसमें ये भी लिखा है कि अस्पताल के चार डॉक्टरों का इसमें सीधा इन्वॉल्वमेंट है। इसीलिए जांच के दौरान हमें हर कदम पर परेशान किया जा रहा है। प्रोफेशनल एथिक्स, हालात का हवाला देकर आकाश नाग की ओर से खुद को जांच से अलग किए जाने की मांग की गई है। कोलकाता रेप मर्डर केस इस वायरल हो रहे पत्र को सीबीआई ने फर्जी करार दिया है।
सीबीआई की ओर से कहा गया है कि इस मामले की जांच सीबीआई मुख्यालय, दिल्ली द्वारा की जा रही है। इसके अलावा, डॉ. आकाश नाग नाम का कोई अधिकारी सीबीआई में नहीं है। यह पत्र पूरी तरह से झूठ है। सीबीआई के स्पष्टीकरण में लोगों को सलाह दी गई है कि वह उक्त पत्र या इस तरह के किसी भी शरारती कोशिश को नजरअंदाज करें। सीबीआई गंभीरता के साथ मामले की जांच कर रही है।